कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सोमवार देर रात दावा किया कि देशभर में आंदोलन में शामिल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पार्टी प्रवक्ताओं ने कहा कि सरकार के प्रतिनिधियों के साथ हुई बातचीत के बाद उन्हें यह आश्वासन दिया गया है कि किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ भविष्य में दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। देर रात जारी वीडियो संदेश में CJP ने इसे आंदोलन से जुड़े लोगों के लिए बड़ी राहत बताया।
CJP प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि रात करीब एक बजे पार्टी की ओर से वीडियो जारी कर सरकार के साथ हुई बातचीत की जानकारी सार्वजनिक की गई। उनके अनुसार, बैठक के दौरान अधिकारियों ने बिहार सरकार के गृह विभाग से जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति दिखाई, जिसमें कहा गया है कि आंदोलन से जुड़े मामलों में दर्ज एफआईआर वापस लेने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। सौरव ने कहा कि पार्टी की मुख्य चिंता यह थी कि कहीं प्रदर्शन में शामिल लोगों को बाद में अलग-अलग राज्यों में परेशान न किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार से स्पष्ट रूप से पूछा गया कि क्या आंदोलन में शामिल लोगों की सुरक्षा की गारंटी दी जाएगी। सौरव के मुताबिक, अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि किसी भी प्रदर्शनकारी को प्रताड़ित नहीं किया जाएगा और इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना जारी करने की बात भी कही गई है। पार्टी ने कहा कि उसका उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि आंदोलन में शामिल लोगों को भविष्य में किसी प्रकार की प्रशासनिक या कानूनी परेशानी का सामना न करना पड़े।
इससे पहले सोमवार शाम CJP ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार पर समझौते की शर्तों का पालन न करने का आरोप लगाया था। पार्टी प्रवक्ताओं ने कहा था कि यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का लिखित आश्वासन नहीं मिला तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जा सकता है। पार्टी का कहना था कि उसने अपना देशव्यापी आंदोलन सरकार के इस भरोसे पर समाप्त किया था कि किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं होगी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि वे पार्टी को कानूनी सहायता प्रदान कर रहे हैं और आंदोलन से जुड़े लोगों को न्यायिक मदद उपलब्ध कराने में सहयोग करेंगे। सिब्बल ने यह भी कहा कि किसी भी नागरिक के खिलाफ की गई कार्रवाई कानून के दायरे में होनी चाहिए और यदि कहीं अधिकारों का उल्लंघन हुआ है तो उसे कानूनी तरीके से चुनौती दी जाएगी।
उधर बिहार सरकार ने सोमवार को घोषणा की कि 26 जुलाई को शाम 6 बजे से पहले राज्य में हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ कोई नई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। सरकार ने यह भी कहा कि प्रदर्शन से जुड़े मामलों में दर्ज एफआईआर, आपराधिक शिकायतें और कारण बताओ नोटिस वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। साथ ही जिन लोगों को हिरासत में लिया गया है, उन्हें रिहा करने की दिशा में भी कार्रवाई की जाएगी।
CJP की कानूनी समन्वयक के रूप में सामने आईं रत्ना सिंह ने दावा किया कि पार्टी की लीगल टीम विभिन्न राज्यों में हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों की मदद कर रही है। उनके अनुसार, कई स्थानों पर वकीलों को सक्रिय किया गया है ताकि गिरफ्तार लोगों को शीघ्र कानूनी सहायता मिल सके। उन्होंने कहा कि पार्टी उन मामलों का दस्तावेजीकरण भी कर रही है जिनमें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ गंभीर धाराएं लगाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।
पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ जिलों में पुलिस कार्रवाई जरूरत से ज्यादा कठोर रही। रत्ना सिंह ने कहा कि पटना, सिवान और छपरा जैसे क्षेत्रों से बल प्रयोग और बड़ी संख्या में अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जाने की सूचनाएं मिली हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी इन मामलों की कानूनी समीक्षा कर रही है और जरूरत पड़ने पर अदालत का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
आंदोलन समाप्त होने के बाद CJP ने आगे की रणनीति भी घोषित की है। संगठन ने घायल प्रदर्शनकारियों और कानूनी मामलों में फंसे लोगों की सहायता के लिए सार्वजनिक सहयोग अभियान शुरू करने की बात कही है। इसके अलावा देशभर में लीगल एड सेल गठित करने, जिला स्तर पर वकीलों का नेटवर्क तैयार करने और एक डिजिटल पोर्टल के माध्यम से पुलिस कार्रवाई से जुड़े फोटो व वीडियो एकत्र करने की योजना भी सामने रखी गई है।
दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने कहा है कि वह पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा इंतजाम मजबूत किए गए हैं। पुलिस ने बताया कि प्रदर्शनकारियों की पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया की गई है तथा संदिग्ध मामलों की जांच जारी है। हालांकि CJP का कहना है कि आंदोलन से जुड़े लोगों को सामूहिक रूप से अपराधी की तरह नहीं देखा जाना चाहिए और सरकार को अपने आश्वासन को स्पष्ट रूप से लागू करना चाहिए।

