सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को लापता लोगों के मामलों में तुरंत FIR दर्ज करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि इसमें व्यक्ति की उम्र या लिंग के आधार पर कोई भेद नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने कहा कि लापता व्यक्ति से संबंधित सूचना मिलने पर पुलिस को FIR दर्ज करनी होगी। इसमें बच्चे और वयस्क दोनों शामिल हैं। किसी व्यक्ति की उम्र को FIR दर्ज करने में बाधा नहीं बनाया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस बात पर हैरानी जताई कि कुछ राज्यों ने उसके पहले के आदेश को केवल बच्चों से जुड़ा हुआ समझ लिया। कोर्ट ने कहा कि आदेश में इस्तेमाल किया गया व्यक्ति शब्द हर व्यक्ति के लिए है।
कोर्ट ने राज्यों की इस व्याख्या को गंभीरता से लिया। पीठ ने कहा कि उसके आदेश को केवल बच्चों तक सीमित समझना उचित नहीं है और इसे लेकर राज्यों की ओर से दिया गया तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके निर्देशों का पालन करना राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की जिम्मेदारी है। लापता व्यक्ति की सूचना मिलने के बाद पुलिस को बिना अनावश्यक देरी के FIR दर्ज करनी होगी।
कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर किसी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश ने उसके आदेश का पालन नहीं किया, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है।
ऐसी स्थिति में संबंधित मुख्य सचिव और DGP को अवमानना का नोटिस जारी किया जा सकता है। उन्हें व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होकर यह बताना होगा कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।
इस मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि लापता लोगों से जुड़े मामलों में उसके निर्देशों का पालन गंभीरता से किया जाना चाहिए।
इससे पहले 22 मई को भी सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की पुलिस को निर्देश दिया था कि किसी व्यक्ति के लापता होने की सूचना मिलते ही बिना प्रारंभिक जांच के FIR दर्ज की जाए।
कोर्ट का यह निर्देश ऐसे समय में आया था जब देश में बड़ी संख्या में बच्चे लापता बताए गए थे। अब कोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि लापता व्यक्ति के मामले में उम्र या लिंग के आधार पर FIR दर्ज करने से इनकार नहीं किया जा सकता।

