32 साल पुरानी शादी का हुआ अंत: सुप्रीम कोर्ट ने उमर अब्दुल्ला और पायल के आपसी सहमति से तलाक को दी मंजूरी

You are currently viewing 32 साल पुरानी शादी का हुआ अंत: सुप्रीम कोर्ट ने उमर अब्दुल्ला और पायल के आपसी सहमति से तलाक को दी मंजूरी

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी पत्नी पायल अब्दुल्ला के तलाक को मंजूरी दे दी। दोनों ने अदालत को बताया कि वे आपसी सहमति से अपने वैवाहिक संबंध को समाप्त करना चाहते हैं और लंबे समय से चले आ रहे सभी विवादों को सुलझाने का निर्णय ले चुके हैं। अदालत ने उनकी संयुक्त सहमति को स्वीकार करते हुए विवाह को कानूनी रूप से समाप्त कर दिया।

उमर अब्दुल्ला और पायल की शादी करीब 32 वर्ष पहले हुई थी। दंपति पिछले कई वर्षों से अलग रह रहा था और अदालत में दी गई जानकारी के अनुसार वे वर्ष 2011 से एक-दूसरे से अलग रह रहे थे। लंबे समय तक चले वैवाहिक विवाद के बाद दोनों ने अंततः कानूनी रूप से अलग होने का फैसला किया।

यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक तब पहुंचा जब उमर अब्दुल्ला ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी, जिसमें उनकी शादी को समाप्त करने से इनकार कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के निर्णय को बरकरार रखा था, जिसके बाद उन्होंने सर्वोच्च अदालत का रुख किया।

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट की पीठ को बताया कि दोनों पक्षों ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विवाह समाप्त करने के लिए संयुक्त आवेदन दायर किया है। यह प्रावधान सर्वोच्च अदालत को पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए विशेष अधिकार प्रदान करता है, जिसके तहत अदालत ने मामले का अंतिम निपटारा किया।

उमर अब्दुल्ला और पायल की पहली मुलाकात दिल्ली के ओबेरॉय होटल में हुई थी, जहां दोनों कार्यरत थे। समय के साथ उनकी मित्रता विवाह में बदली। इस विवाह से उनके दो बेटे हैं, जिनके नाम जहीर और जमीर हैं। परिवार से जुड़े मुद्दों पर भी दोनों पक्षों ने आपसी समझौते के जरिए सहमति बनाई।

इस मामले की पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को आपसी बातचीत के माध्यम से विवाद सुलझाने की सलाह दी थी। अदालत ने उम्मीद जताई थी कि दोनों गंभीरता के साथ समाधान की दिशा में आगे बढ़ेंगे। बाद की कार्यवाही में दोनों पक्षों ने सहमति बनाकर विवाह समाप्त करने का निर्णय अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया।

उमर अब्दुल्ला ने मूल रूप से क्रूरता के आधार पर तलाक की मांग की थी। हालांकि, वर्ष 2016 में फैमिली कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा था कि प्रस्तुत तथ्यों से यह साबित नहीं होता कि विवाह पूरी तरह टूट चुका है, और क्रूरता के आरोप पर्याप्त रूप से सिद्ध नहीं किए गए।

इसके बाद उन्होंने फैमिली कोर्ट के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन दिसंबर 2023 में हाईकोर्ट ने भी उनकी अपील खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए वैवाहिक संबंध समाप्त करने से इनकार कर दिया था। इसी निर्णय के खिलाफ उमर अब्दुल्ला ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में पायल को गुजारा भत्ते के रूप में प्रति माह 1.5 लाख रुपये देने तथा एक बेटे की पढ़ाई के खर्च के लिए 60 हजार रुपये प्रतिमाह देने का निर्देश दिया था। यह आदेश उस समय तक प्रभावी रहा जब तक मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित था और अंतिम निर्णय नहीं आ गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2025 में दोनों पक्षों को साथ बैठकर अपने मतभेद दूर करने और स्थायी समाधान खोजने का निर्देश दिया था। इसके बाद कई दौर की बातचीत हुई और अंततः दोनों ने आपसी सहमति से विवाह समाप्त करने का फैसला किया। शुक्रवार को सर्वोच्च अदालत की मंजूरी के साथ यह लंबा कानूनी विवाद समाप्त हो गया और 32 वर्ष पुराना वैवाहिक संबंध कानूनी रूप से खत्म हो गया।