प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाली छात्रा रुचिका सिंह पर दर्ज FIR को लेकर अब राजनीतिक विवाद गहराता दिखाई दे रहा है। शुक्रवार को कॉकरोच जनता पार्टी ने इस कार्रवाई का खुलकर विरोध करते हुए कहा कि किसी राजनीतिक टिप्पणी या अभद्र बयान को सीधे आपराधिक मुकदमे में बदलना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ माना जाना चाहिए। पार्टी ने इस मामले को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और आपराधिक कानून के इस्तेमाल से जुड़ा मुद्दा बताया।
पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यदि किसी व्यक्ति को बयान से आपत्ति है, तो उसके लिए मानहानि जैसे कानूनी विकल्प उपलब्ध हैं, लेकिन सीधे आपराधिक धाराएं लगाना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्रवाई से यह संदेश जाता है कि राजनीतिक व्यक्तियों पर की गई तीखी या आपत्तिजनक टिप्पणियों को भी आपराधिक दायरे में लाया जा रहा है, जिससे सामान्य नागरिकों में डर का माहौल बन सकता है।
यह पूरा मामला 23 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो में रुचिका सिंह कथित रूप से प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करती हुई दिखाई दी थी। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। कुछ लोगों ने कार्रवाई की मांग की, जबकि कुछ ने इसे राजनीतिक अभिव्यक्ति का मामला बताया।
वायरल वीडियो के आधार पर गाजियाबाद निवासी स्मृति सिंह ने नोएडा के एक्सप्रेसवे पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि वीडियो में इस्तेमाल की गई भाषा न केवल प्रधानमंत्री के प्रति अपमानजनक है, बल्कि सार्वजनिक भावना को भी प्रभावित कर सकती है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले को दर्ज करते हुए आगे की प्रक्रिया शुरू की।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में पहले जीरो FIR दर्ज की गई। चूंकि घटना नई दिल्ली क्षेत्र में हुई थी, इसलिए प्राथमिकी को आगे की जांच के लिए संसद मार्ग पुलिस स्टेशन भेज दिया गया। पुलिस ने कहा कि कानून के तहत ऐसी व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि किसी व्यक्ति की शिकायत केवल क्षेत्राधिकार के कारण लंबित न रहे और प्रारंभिक कार्रवाई तुरंत की जा सके।
शिकायतकर्ता स्मृति सिंह का कहना है कि सोशल मीडिया पर रुचिका सिंह के कई वीडियो प्रसारित हो रहे हैं, जिनमें प्रधानमंत्री और उनके परिवार के प्रति कथित रूप से अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया है। उनके अनुसार, सार्वजनिक मंचों पर इस तरह की भाषा समाज में गलत संदेश देती है और राजनीतिक संवाद की गरिमा को प्रभावित करती है। उन्होंने पुलिस से मामले में उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
दूसरी ओर, कॉकरोच जनता पार्टी ने सवाल उठाया कि क्या किसी आपत्तिजनक राजनीतिक टिप्पणी को सार्वजनिक उपद्रव या आपराधिक अपमान जैसी धाराओं के तहत दर्ज किया जाना चाहिए। पार्टी का कहना है कि लोकतंत्र में राजनीतिक नेताओं की आलोचना और तीखी प्रतिक्रिया नई बात नहीं है। हालांकि पार्टी ने अभद्र भाषा का समर्थन नहीं किया, लेकिन उसने यह जरूर कहा कि हर विवादास्पद बयान को आपराधिक मुकदमे में बदलना उचित नहीं माना जा सकता।
मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। एक वर्ग का कहना है कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों के प्रति सम्मानजनक भाषा का इस्तेमाल होना चाहिए, जबकि दूसरा वर्ग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में देख रहा है। कई लोगों ने यह भी कहा कि राजनीतिक असहमति और व्यक्तिगत अपमान के बीच स्पष्ट सीमा तय होना जरूरी है, ताकि कानून का इस्तेमाल संतुलित तरीके से हो सके।
कानूनी जानकारों के अनुसार, जीरो FIR ऐसी व्यवस्था है जिसके तहत कोई भी व्यक्ति किसी भी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करा सकता है, भले ही घटना उस थाने के अधिकार क्षेत्र में न हुई हो। बाद में संबंधित थाना उस FIR को उस क्षेत्र के पुलिस स्टेशन को भेज देता है जहां घटना वास्तव में हुई थी। इस प्रक्रिया का उद्देश्य शिकायत दर्ज कराने में होने वाली देरी को रोकना है।
फिलहाल मामले की जांच संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के स्तर पर आगे बढ़ाई जाएगी। पुलिस वीडियो की प्रामाणिकता, बयान की परिस्थितियों और लागू धाराओं की जांच कर रही है। वहीं राजनीतिक दलों और सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर जारी बहस ने इसे केवल एक पुलिस कार्रवाई से आगे बढ़ाकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, राजनीतिक आलोचना और आपराधिक कानून के उपयोग से जुड़े बड़े सार्वजनिक विमर्श का विषय बना दिया है।

