इंदौर में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के सरकारी आवास के बाहर बुधवार को एक दंपती ने विरोध प्रदर्शन किया। दोनों संविधान की प्रति हाथ में लेकर मंत्री के निवास के मुख्य द्वार के सामने खड़े हो गए और हाल ही में दिए गए कुछ सार्वजनिक बयानों पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना था कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराने पहुंचे हैं और अपनी बात मंत्री तक पहुंचाना चाहते हैं। इस दौरान मौके पर मौजूद लोगों का भी ध्यान उनकी ओर आकर्षित हुआ।
प्रदर्शन की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और दंपती से बातचीत शुरू की। पुलिस अधिकारियों ने उनसे प्रदर्शन की अनुमति संबंधी जानकारी मांगी और सार्वजनिक स्थान पर बिना पूर्व स्वीकृति के विरोध प्रदर्शन करने के नियमों के बारे में समझाया। हालांकि दंपती ने अपनी बात पर कायम रहते हुए वहां से हटने से इनकार कर दिया और कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना चाहते हैं।
खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताने वाले प्रहलाद पाण्डेय और उनकी पत्नी संगीता पाण्डेय ने बताया कि वे मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के कुछ हालिया बयानों से बेहद आहत हैं। उनका आरोप था कि प्रतियोगी परीक्षाओं और छात्र आंदोलनों से जुड़े मुद्दों पर मंत्री की टिप्पणियों ने छात्रों, अभिभावकों और युवाओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। इसी कारण उन्होंने मंत्री के आवास के बाहर विरोध दर्ज कराने का निर्णय लिया।
प्रहलाद पाण्डेय ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न करना नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत अपनी असहमति प्रकट करना है। उन्होंने कहा कि छात्रों से जुड़े मामलों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और सार्वजनिक पद पर बैठे लोगों को अपने शब्दों के चयन में संयम बरतना चाहिए ताकि समाज में गलत संदेश न जाए।


इसी दौरान परदेशीपुरा थाना प्रभारी आरडी कानवा सहित पुलिस अधिकारी वहां पहुंचे और दंपती को समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों ने बताया कि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय उस समय इंदौर में मौजूद नहीं थे और बिना प्रशासनिक अनुमति किसी जनप्रतिनिधि के आवास के बाहर प्रदर्शन करना नियमों के अनुरूप नहीं है। पुलिस ने कई बार अनुरोध किया कि वे शांतिपूर्वक वहां से चले जाएं, लेकिन दंपती अपने निर्णय पर अड़े रहे।
स्थिति को नियंत्रित रखने और किसी भी संभावित अव्यवस्था से बचने के उद्देश्य से पुलिस ने दोनों को अभिरक्षा में लेने का फैसला किया। पुलिसकर्मियों ने पहले प्रहलाद पाण्डेय को वाहन में बैठाया और उसके बाद उनकी पत्नी संगीता पाण्डेय को भी साथ लेकर थाने पहुंचाया। इस पूरी कार्रवाई के दौरान पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता का हवाला दिया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सार्वजनिक स्थान पर किसी भी प्रकार का प्रदर्शन करने के लिए प्रशासन से पूर्व अनुमति लेना आवश्यक होता है। अधिकारियों ने कहा कि अनुमति के बिना विरोध प्रदर्शन किए जाने की स्थिति में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दे उत्पन्न हो सकते हैं। इसी कारण दोनों को पूछताछ के लिए थाने ले जाया गया, जहां उनसे पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली गई।
थाना प्रभारी आरडी कानवा ने बताया कि प्रारंभिक स्तर पर दंपती को पूछताछ के लिए अभिरक्षा में लिया गया है और मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि आगे की कार्रवाई उपलब्ध तथ्यों, पूछताछ और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर तय की जाएगी। पुलिस का कहना है कि किसी भी प्रकार की कार्रवाई कानून के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार ही की जाएगी।
जानकारी के अनुसार, प्रहलाद पाण्डेय और संगीता पाण्डेय इससे पहले भी सार्वजनिक मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं। हाल ही में उन्होंने सांसद शंकर लालवानी के आवास के बाहर भी प्रदर्शन किया था, जहां उन्होंने शिक्षा से जुड़े मामलों पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित जिम्मेदार लोगों से जवाबदेही तय करने की मांग की थी। इससे स्पष्ट होता है कि दंपती लगातार विभिन्न सार्वजनिक विषयों पर अपनी आवाज उठाते रहे हैं।
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा बनी हुई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है, जबकि दंपती का कहना है कि उनका विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण और संवैधानिक दायरे में था। दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि किसी भी प्रकार के प्रदर्शन के लिए निर्धारित नियमों और अनुमति प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो। मामले में आगे की स्थिति पुलिस जांच और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।

