NEET पेपर लीक पर संसद में घमासान, राहुल गांधी ने स्पीकर से चर्चा की मांग की, खड़गे ने विपक्ष की आवाज दबाने का लगाया आरोप

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संसद के मानसून सत्र के दौरान NEET UG 2026 पेपर लीक का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया। विपक्षी दलों ने इस मामले को गंभीर बताते हुए लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में तत्काल चर्चा कराने की मांग की। कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष के सांसदों ने सरकार से जवाब मांगते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। सदन के भीतर नारेबाजी और विरोध के कारण सामान्य कामकाज प्रभावित हुआ और दोनों सदनों की कार्यवाही को कई बार स्थगित करना पड़ा। विपक्ष का कहना था कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मामले पर संसद में खुली और विस्तृत चर्चा कराई जानी चाहिए ताकि सरकार अपनी स्थिति स्पष्ट कर सके।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस पूरे मामले को लेकर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की। राहुल गांधी ने आग्रह किया कि NEET पेपर लीक जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर संसद के भीतर चर्चा के लिए पर्याप्त समय दिया जाए। उनका कहना था कि यह केवल एक परीक्षा से जुड़ा मामला नहीं बल्कि देश के करोड़ों युवाओं और उनके भविष्य का सवाल है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि संसद लोकतांत्रिक विमर्श का सबसे बड़ा मंच है और छात्रों से जुड़े ऐसे मामलों पर चर्चा से बचना उचित नहीं होगा।m

राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा अवसर नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना था कि जैसे ही उन्होंने सदन में अपनी बात शुरू की, उनका माइक्रोफोन बंद कर दिया गया। खड़गे ने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत बताते हुए कहा कि संसद में हर पक्ष को अपनी बात रखने का समान अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार छात्रों के हित से जुड़े मुद्दों को उठाना चाहता है, लेकिन चर्चा का अवसर नहीं मिलने से लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

इस मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए कांग्रेस के सांसद केसी वेणुगोपाल और सैयद नासिर हुसैन ने राज्यसभा में नियम 267 के तहत कार्यवाही स्थगित कर तत्काल चर्चा कराने का नोटिस दिया। उन्होंने मांग की कि सदन के अन्य कार्यों को कुछ समय के लिए रोककर NEET UG 2026 पेपर लीक मामले पर विस्तृत चर्चा कराई जाए। विपक्ष का तर्क था कि यह मामला लाखों अभ्यर्थियों की मेहनत, शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

संसद के भीतर लगातार जारी विरोध और हंगामे के चलते दोनों सदनों का सामान्य कामकाज प्रभावित हुआ। विपक्षी सांसदों ने सरकार से स्पष्ट जवाब की मांग करते हुए लगातार विरोध दर्ज कराया। कई बार सदन की कार्यवाही शुरू करने का प्रयास किया गया, लेकिन विपक्ष के विरोध के कारण स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। अंततः लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही को अगले दिन तक के लिए स्थगित करना पड़ा। इससे यह स्पष्ट हुआ कि NEET पेपर लीक का मुद्दा संसद के मौजूदा सत्र में प्रमुख राजनीतिक विषयों में शामिल हो चुका है।

इस बीच संसद भवन में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की संसदीय दल की बैठक भी आयोजित की गई। बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक के मामले को गंभीरता से लेने की बात कही है। उनके अनुसार प्रधानमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि यदि जांच में कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है और किसी भी तरह की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

विपक्ष का कहना है कि केवल जांच और कार्रवाई का आश्वासन पर्याप्त नहीं है, बल्कि संसद के भीतर इस पूरे मामले पर विस्तृत चर्चा भी होनी चाहिए। विपक्षी नेताओं का मानना है कि छात्रों और अभिभावकों के मन में कई सवाल हैं जिनका जवाब सरकार को संसद के माध्यम से देना चाहिए। उनका यह भी कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु ठोस नीतिगत कदम उठाए जाने चाहिए।

NEET पेपर लीक का मामला केवल राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता से भी जुड़ा हुआ है। लाखों छात्र वर्षों तक कठिन मेहनत और तैयारी के बाद इन परीक्षाओं में शामिल होते हैं। ऐसे में पेपर लीक जैसी घटनाएं छात्रों के विश्वास को कमजोर करती हैं और पूरी परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल खड़े करती हैं। इसी कारण विपक्ष इस मुद्दे को राष्ट्रीय महत्व का विषय बताते हुए संसद में व्यापक चर्चा की मांग कर रहा है, जबकि सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की बात दोहरा रही है।

संसद के मानसून सत्र में NEET पेपर लीक को लेकर पैदा हुआ गतिरोध आने वाले दिनों में भी राजनीतिक बहस का प्रमुख केंद्र बना रह सकता है। एक ओर विपक्ष संसद के भीतर इस विषय पर विस्तृत चर्चा, जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग कर रहा है, वहीं सरकार दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का भरोसा दिला रही है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि संसद में इस मुद्दे पर चर्चा कब होती है और सरकार छात्रों के हितों की रक्षा तथा परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने के लिए कौन-कौन से ठोस कदम उठाती है।