त्रिपुरा DGP अनुराग धनखड़ की संदिग्ध मौत: पुलिस मुख्यालय में मिला शव, 1994 बैच के IPS अफसर थे; 1984 दंगों की जांच से जुड़े थे

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त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (DGP) अनुराग धनखड़ की सोमवार सुबह संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। पुलिस मुख्यालय में वह अचेत अवस्था में मिले थे, जिसके बाद अधिकारियों ने तुरंत उन्हें अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। शुरुआती जांच में पुलिस ने आत्महत्या की आशंका जताई है।

अनुराग धनखड़ का शव फिलहाल अगरतला के गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल में रखा गया है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण शुरू कर दिया है और मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

अनुराग धनखड़ 1994 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी थे। वह उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बिहारीपुर गांव के रहने वाले थे। अपने लंबे पुलिस करियर के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वह 1984 के सिख विरोधी दंगों की जांच से भी जुड़े रहे थे।

बागपत के बिहारीपुर गांव में अनुराग धनखड़ का पैतृक घर आज भी मौजूद है। हालांकि, लंबे समय से उनके परिवार का कोई सदस्य वहां नहीं रह रहा है। गांव के लोगों के मुताबिक, वह करीब 25 साल पहले आखिरी बार गांव आए थे। इसके बाद उनका यहां आना-जाना काफी कम हो गया था।

गांववालों ने बताया कि अनुराग धनखड़ ने शुरुआती शिक्षा अपने गांव के प्राथमिक स्कूल से हासिल की थी। उन्होंने पांचवीं कक्षा तक गांव में पढ़ाई की, इसके बाद सरूरपुर इंटर कॉलेज से 12वीं की शिक्षा पूरी की। बाद में उन्होंने बड़ौत डिग्री कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की और आगे की तैयारी के लिए दिल्ली चले गए।

अनुराग धनखड़ के परिवार में उनकी पत्नी, एक बेटा और एक बेटी हैं। उनके बड़े भाई रमेश कुमार नेवी से रिटायर हो चुके हैं, जबकि छोटे भाई रवि कुमार खेती करते हैं। परिवार और गांव के लोग उनकी मौत की खबर से स्तब्ध हैं।

अनुराग धनखड़ के पुराने मित्र रमेश कुमार ने बताया कि दोनों ने 12वीं तक साथ पढ़ाई की थी। उन्होंने बताया कि अनुराग पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में भी रुचि रखते थे और वॉलीबॉल के अच्छे खिलाड़ी थे। ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने दिल्ली जाकर अपने करियर की दिशा तय की।

IPS अधिकारी बनने के बाद अनुराग धनखड़ ने पुलिस विभाग में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। उनकी गिनती अनुभवी अधिकारियों में होती थी। त्रिपुरा के DGP पद पर रहते हुए वह राज्य की कानून व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारियां संभाल रहे थे।

फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और मौत के कारणों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। फॉरेंसिक रिपोर्ट और अन्य जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने कहा है कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों की गहन जांच की जा रही है।