नर्मदा परियोजना से जुड़े विस्थापन और भूमि मुआवजे के मुद्दे पर लंबे समय से चला आ रहा विवाद आखिरकार समाप्त होने की दिशा में बढ़ गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें सभी राज्यों ने आपसी सहमति के साथ समाधान पर सहमति व्यक्त की। इस फैसले को परियोजना से प्रभावित हजारों परिवारों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
बैठक के दौरान चारों राज्यों ने इस बात पर सहमति जताई कि विस्थापित परिवारों के हितों को प्राथमिकता देते हुए भूमि मुआवजा और पुनर्वास से जुड़े लंबित मामलों का समाधान सहयोग और समन्वय के आधार पर किया जाएगा। लंबे समय से विभिन्न प्रशासनिक और कानूनी कारणों से अटके मामलों को अब तेजी से आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नर्मदा परियोजना देश की सबसे महत्वपूर्ण बहुउद्देश्यीय परियोजनाओं में से एक है। इसके निर्माण से सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन के क्षेत्र में व्यापक लाभ मिला है, लेकिन विस्थापन और मुआवजे से जुड़े मुद्दे वर्षों तक चुनौती बने रहे। अब राज्यों के बीच बनी सहमति इस दिशा में एक सकारात्मक कदम है।

उन्होंने कहा कि चारों राज्यों ने आपसी विश्वास और सहयोग की भावना के साथ इस जटिल विषय का समाधान निकालने का निर्णय लिया है। इससे प्रभावित परिवारों को न्याय मिलने की प्रक्रिया और अधिक तेज होगी तथा विभिन्न लंबित मामलों के निपटारे में भी आसानी आएगी।
अमित शाह ने बताया कि नर्मदा परियोजना का सबसे अधिक लाभ मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान को मिला है। परियोजना के माध्यम से लाखों किसानों तक सिंचाई का पानी पहुंचा, जबकि कई क्षेत्रों में पेयजल उपलब्धता भी बेहतर हुई। इसके साथ ही बिजली उत्पादन में वृद्धि होने से औद्योगिक और ग्रामीण विकास को भी गति मिली।
उन्होंने विशेष रूप से राजस्थान का उल्लेख करते हुए कहा कि भले ही राज्य को मिलने वाला जल क्षेत्रफल के हिसाब से सीमित दिखाई देता हो, लेकिन जिन इलाकों तक नर्मदा का पानी पहुंचा है वहां कृषि उत्पादन, भूमि की कीमत और किसानों की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।
बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि परियोजना से प्रभावित लोगों के पुनर्वास और मुआवजे की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और प्रभावी बनाया जाएगा। संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर शेष मामलों का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने पर सहमति बनी।
गृह मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और राज्यों के बीच सहयोग की भावना को लगातार मजबूत कर रही है। उनका मानना है कि जब राज्य आपसी संवाद और विश्वास के साथ काम करते हैं तो वर्षों पुराने जटिल विवाद भी शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाए जा सकते हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल सुरक्षा को मजबूत करने और जल क्षेत्र में सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों के बीच बेहतर समन्वय बनने से विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आई है और कई पुराने विवादों का समाधान संभव हो पाया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चार राज्यों के बीच बनी यह सहमति न केवल नर्मदा परियोजना से जुड़े लंबित मामलों के समाधान में महत्वपूर्ण साबित होगी, बल्कि भविष्य में अंतरराज्यीय परियोजनाओं के संचालन और समन्वय के लिए भी एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करेगी। इससे प्रभावित परिवारों को राहत मिलने के साथ-साथ विकास कार्यों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।