केरल के मुख्यमंत्री ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर वरिष्ठ पत्रकार और द टेलीग्राफ के पूर्व संपादक आर. राजगोपाल के पासपोर्ट रिन्यूअल मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट में आई आपत्तियों के कारण पासपोर्ट का नवीनीकरण लंबित पड़ा है, जिससे राजगोपाल को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में लिखा कि राजगोपाल लंबे समय से कोलकाता में रह रहे हैं और उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन दशक से अधिक समय तक महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके बावजूद वोटर लिस्ट से नाम हटने के बाद तैयार हुई पुलिस सत्यापन रिपोर्ट का असर अब उनके पासपोर्ट रिन्यूअल पर भी पड़ रहा है। मुख्यमंत्री ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए पश्चिम बंगाल सरकार से आवश्यक कदम उठाने और संबंधित अधिकारियों को उचित निर्देश देने की अपील की।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने के फैसले के खिलाफ अपील की प्रक्रिया पहले से जारी है, लेकिन उस प्रक्रिया के पूरा होने का इंतजार करते हुए पासपोर्ट रिन्यूअल रोक देना उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने पत्र में आग्रह किया कि मामले की जल्द समीक्षा कर नागरिक को राहत देने के लिए आवश्यक हस्तक्षेप किया जाए।

इस मुद्दे को लेकर उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर पत्र की प्रति भी साझा की, जिसके बाद यह मामला सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया। उनका कहना है कि प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण किसी व्यक्ति के वैध दस्तावेजों के नवीनीकरण में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
राजगोपाल का कहना है कि विशेष मतदाता पुनरीक्षण (SIR) के दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटने के बाद उनके पासपोर्ट सत्यापन की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई। इसी वजह से उनका रिन्यूअल आवेदन आगे नहीं बढ़ सका। उनका मानना है कि यदि इस तरह मतदाता सूची से जुड़ी जानकारी का उपयोग अन्य सरकारी प्रक्रियाओं में किया जाता है, तो इससे कई नागरिकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।