शनिवार को उज्जैन में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर में दान से जुड़े कथित गड़बड़ी के मामले को लेकर केंद्र सरकार और राम मंदिर ट्रस्ट पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कराने की आवश्यकता बताई।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार की निगरानी में हुआ है, इसलिए ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और उससे जुड़े किसी भी विवाद की जवाबदेही भी सरकार की बनती है। उनका कहना था कि श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर में अर्पित किए गए दान की पारदर्शिता सुनिश्चित करना ट्रस्ट की जिम्मेदारी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि दान से संबंधित कथित अनियमितताओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और यदि किसी भी स्तर पर वित्तीय गड़बड़ी सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थाओं में आने वाला दान करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा होता है, इसलिए उसकी निगरानी पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए।
प्रेस वार्ता के दौरान दिग्विजय सिंह ने कुछ दस्तावेज भी मीडिया के सामने प्रस्तुत किए। उनका दावा था कि इन दस्तावेजों के आधार पर कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि सभी तथ्यों की पुष्टि और जांच पूरी होने के बाद ही विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।
राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम लेते हुए दिग्विजय सिंह ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि यदि दान से जुड़ी किसी भी प्रकार की अनियमितता के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित अधिकारियों और ट्रस्ट पदाधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर भी अपनी आपत्तियां दोहराईं। उनका कहना था कि धार्मिक परंपराओं और वैदिक विधि-विधान का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। उन्होंने इस विषय पर भी ट्रस्ट की भूमिका पर सवाल उठाए।
कांग्रेस नेता ने कहा कि उनकी पार्टी इस पूरे मुद्दे को केवल प्रेस वार्ता तक सीमित नहीं रखेगी। उन्होंने बताया कि कांग्रेस कार्यकर्ता गांव-गांव और घर-घर जाकर लोगों को दान से जुड़े कथित मामले की जानकारी देंगे। इसके लिए जिला स्तर से लेकर पंचायत स्तर तक संगठनात्मक तैयारी की जा रही है।
दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि इन संगठनों की भूमिका धार्मिक गतिविधियों की बजाय राजनीतिक हितों से अधिक जुड़ी हुई दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थाओं के संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
उज्जैन में आयोजित इस प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने महाकाल मंदिर की व्यवस्थाओं का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि मंदिर से जुड़े कुछ पुराने भूमि मामलों और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं तथा इन मामलों में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
भूमि संबंधी मुद्दों पर बोलते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनके पास कुछ नए दस्तावेज पहुंचे हैं, जिनका अध्ययन किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति का नाम सार्वजनिक करना उचित नहीं होगा, लेकिन यदि दस्तावेजों में अनियमितताओं की पुष्टि होती है तो पूरे मामले को सार्वजनिक किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस भविष्य में भी इस विषय को प्रमुखता से उठाएगी और धार्मिक संस्थाओं में आने वाले दान, संपत्ति तथा प्रशासनिक व्यवस्थाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग जारी रखेगी। उनके अनुसार श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े किसी भी मामले में जवाबदेही तय होना आवश्यक है।
प्रेस वार्ता के अंत में दिग्विजय सिंह ने दोहराया कि राम मंदिर में दान से जुड़े कथित मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को जन-जन तक पहुंचाने के लिए व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाएगी।