प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पेट्रोल और डीजल के संयमित उपयोग की अपील के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने भी प्रशासनिक स्तर पर कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने आधिकारिक काफिले में वाहनों की संख्या कम करने का निर्णय लिया है। अब मुख्यमंत्री के कारकेड में पहले की तुलना में लगभग आधे वाहन ही शामिल रहेंगे।
भोपाल से नरसिंहपुर रवाना होते समय इसका असर साफ दिखाई दिया। मुख्यमंत्री के साथ पहले जहां 13 वाहनों का काफिला चलता था, वहीं अब केवल 7 वाहन ही उनके साथ नजर आए। सरकार इस पहल को ईंधन संरक्षण और सादगीपूर्ण प्रशासनिक व्यवस्था से जोड़कर देख रही है।
ईंधन बचत को लेकर सरकार का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने और ऊर्जा संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की अपील की थी। इसके बाद मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री स्तर से इसकी शुरुआत किए जाने को एक प्रतीकात्मक लेकिन महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
राज्य सरकार के भीतर इसे केवल खर्च कम करने का प्रयास नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवहार में बदलाव के रूप में भी देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, आने वाले समय में अन्य विभागों में भी अनावश्यक वाहनों के उपयोग को सीमित करने पर जोर दिया जा सकता है।
डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ल ने भी दिए निर्देश
मुख्यमंत्री के बाद उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने भी अपने विभागों में वाहनों के सीमित उपयोग को लेकर घोषणा की है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर ईंधन संरक्षण राष्ट्रहित से जुड़ा विषय है और इसमें सभी की भागीदारी जरूरी है।
उन्होंने लिखा कि लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग आगामी आदेश तक विभागीय भ्रमण, निरीक्षण और अन्य शासकीय गतिविधियों में न्यूनतम वाहनों का उपयोग करेगा। साथ ही अनावश्यक वाहन रैली, अतिरिक्त काफिलों और ज्यादा ईंधन खर्च करने वाले आयोजनों से बचने के निर्देश भी दिए गए हैं।
अफसरों को कार पूलिंग और सार्वजनिक परिवहन अपनाने की सलाह
डिप्टी सीएम शुक्ल ने अधिकारियों से अपील की कि वे शासकीय कार्यों में सादगी अपनाएं और सार्वजनिक परिवहन या साझा वाहन व्यवस्था को प्राथमिकता दें। उन्होंने ऊर्जा संरक्षण को पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य से भी जोड़ा।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना भी जरूरी है, ताकि आयातित रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम हो, भूमि और जल की गुणवत्ता सुरक्षित रहे और लोगों को बेहतर खाद्य सामग्री मिल सके। उनके मुताबिक स्वच्छ पर्यावरण, ऊर्जा संरक्षण और प्राकृतिक कृषि — ये तीनों मिलकर स्वस्थ समाज और मजबूत राष्ट्र की नींव तैयार करते हैं।
उन्होंने विभागीय अधिकारियों से यह भी कहा कि वे जनजागरूकता अभियानों में ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को शामिल करें।
खेल मंत्री विश्वास सारंग ने भी कम किया सुरक्षा काफिला
राज्य सरकार के अन्य मंत्रियों ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाना शुरू कर दिया है। खेल और सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने अपने सुरक्षा काफिले में चलने वाले पायलट और फॉलो वाहन हटाने का निर्णय लिया है।
मंत्री सारंग एक ही कार में स्टाफ के साथ मंत्रालय पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की अपील केवल ईंधन बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था और भविष्य से जुड़ा विषय है।
उन्होंने कहा कि यदि देश के लिए कुछ करना है तो प्रधानमंत्री की सलाह को व्यवहार में उतारना जरूरी है। उन्होंने कार्यकर्ताओं और आम लोगों से भी कम से कम पेट्रोल-डीजल उपयोग करने की अपील की।
“विकसित और आत्मनिर्भर भारत” से जोड़ा संदेश
विश्वास सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा देश को आत्मनिर्भर और मजबूत बनाने की दिशा में काम किया है। उन्होंने कोरोना काल का जिक्र करते हुए कहा कि इतने बड़े देश को महामारी से बाहर निकालना आसान नहीं था, लेकिन प्रधानमंत्री के नेतृत्व में यह संभव हुआ।
उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को विकसित और स्वावलंबी भारत मिले, इसके लिए हर नागरिक को अपनी भूमिका निभानी होगी। उनके अनुसार ईंधन की छोटी-छोटी बचत भी देश की बड़ी ताकत बन सकती है।
सरकार के भीतर बदलती कार्यशैली की शुरुआत
मुख्यमंत्री और मंत्रियों द्वारा काफिले छोटे किए जाने को प्रशासनिक कार्यशैली में बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि ऊर्जा संरक्षण का संदेश केवल भाषणों तक सीमित न रहे, बल्कि शासन-प्रशासन के व्यवहार में भी दिखाई दे।
प्रदेश में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में अन्य विभाग और अधिकारी भी इस पहल को किस स्तर तक अपनाते हैं।