डिजिटल डेस्क, इंदौर। लखनऊ में हाल ही में हुए भीषण अग्निकांड के बाद इंदौर जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। शहर में छात्रों और आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए फायर सेफ्टी मानकों की जांच के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत मंगलवार को भंवरकुआं और गीता भवन क्षेत्र में संचालित कई कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण किया गया, जहां सुरक्षा व्यवस्थाओं में गंभीर खामियां सामने आईं।
जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि कई कोचिंग सेंटरों में बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद थे, लेकिन आग लगने जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त फायर सेफ्टी उपकरण, इमरजेंसी एग्जिट और अन्य जरूरी इंतजाम उपलब्ध नहीं थे। सुरक्षा मानकों की अनदेखी को गंभीर मानते हुए प्रशासन ने पहले सभी छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला और इसके बाद 13 कोचिंग संस्थानों को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार कई संस्थानों को पहले भी फायर सेफ्टी नियमों का पालन करने और आवश्यक सुधार करने के लिए नोटिस जारी किए गए थे। निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बावजूद जब संस्थानों ने कमियां दूर नहीं कीं तो सख्त कार्रवाई करना जरूरी हो गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
एसडीएम घनश्याम धनगर के नेतृत्व में गठित संयुक्त टीम ने अभियान की शुरुआत भंवरकुआं क्षेत्र से की। निरीक्षण के दौरान रेजोनेंस, रामानुजन और अन्य प्रमुख कोचिंग संस्थानों में फायर सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन नहीं पाया गया। कई जगह अग्निशमन यंत्र या तो मौजूद नहीं थे या फिर उपयोग की स्थिति में नहीं थे, जबकि आपातकालीन निकासी के पर्याप्त रास्ते भी नहीं मिले।
अभियान केवल शैक्षणिक संस्थानों तक सीमित नहीं रहा। माखनवाला रसोई रेस्टोरेंट में फायर ऑडिट से जुड़े जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं मिले और रसोई के पास बड़ी मात्रा में ज्वलनशील सामग्री असुरक्षित तरीके से रखी हुई पाई गई। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए प्रशासन ने संबंधित संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की। इसके अलावा बेसमेंट में संचालित एक अवैध ऑटो सेंटर को भी नियमों के उल्लंघन के कारण बंद कराया गया।
निरीक्षण के दौरान मेडिकोज करियर इंस्टीट्यूट का भवन भी अधिकारियों के निशाने पर आया। जांच में भवन जर्जर स्थिति में मिला और वहां विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक सुविधाओं का अभाव पाया गया। फायर सेफ्टी उपकरणों की कमी और भवन की खराब स्थिति को देखते हुए संस्थान को तत्काल सील करने का निर्णय लिया गया।
प्रशासन ने बताया कि पिछले दो वर्षों से नगर निगम और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम लगातार शहर के व्यावसायिक, शैक्षणिक और सार्वजनिक भवनों की जांच कर रही है। अब तक 70 से अधिक भवनों पर नियमों के उल्लंघन के कारण कार्रवाई की जा चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में भी यह अभियान जारी रहेगा और जहां भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी मिलेगी, वहां बिना किसी पूर्वाग्रह के सख्त कदम उठाए जाएंगे।
कार्रवाई के दायरे में नालंदा परिसर, स्टडी आईएएस, माइंड कोचिंग क्लासेस, उड़ान करियर इंस्टीट्यूट, अड्डा, विनायक, स्टडी आईक्यू, इंस्पायर लाइब्रेरी, ईरा लाइब्रेरी, गुरुकुल क्लासेस, श्रीजी लाइब्रेरी, सारथी लाइब्रेरी, न्यूक्लियम कोचिंग, आयाम कोचिंग, इकरथ कोचिंग सहित कई अन्य संस्थान शामिल रहे। प्रशासन ने सभी संस्थानों को स्पष्ट संदेश दिया है कि फायर सेफ्टी नियमों का पालन अनिवार्य है और किसी भी प्रकार की लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य केवल नियमों का पालन कराना नहीं, बल्कि हजारों विद्यार्थियों और नागरिकों की जान की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसी वजह से आने वाले समय में शहर के अन्य कोचिंग सेंटर, लाइब्रेरी, हॉस्टल, रेस्टोरेंट और व्यावसायिक परिसरों का भी व्यापक निरीक्षण किया जाएगा, ताकि किसी भी संभावित दुर्घटना को समय रहते रोका जा सके।