अधिकमास के अंतिम दिन सोमवार को सोमवती अमावस्या का दुर्लभ महासंयोग बनने से उज्जैन में आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। तड़के से ही शिप्रा नदी के रामघाट, दत्त अखाड़ा घाट और सोमकुंड पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने पवित्र शिप्रा में स्नान कर पूजा-अर्चना, तर्पण और दान-पुण्य के धार्मिक कार्य संपन्न किए। घाटों पर सुबह से ही धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला चलता रहा और पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बना रहा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस वर्ष सोमवती अमावस्या का महत्व और भी बढ़ गया है, क्योंकि यह अधिकमास के समापन दिवस पर पड़ रही है। पंडित अमर डिब्बेवाला ने बताया कि सोमवार, अमावस्या तिथि, मृगशिरा नक्षत्र और अमृत सिद्धि योग का एक साथ होना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस विशेष संयोग में किए गए स्नान, जप, तप, दान और पूजन का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। इसी कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु सुबह से ही घाटों और मंदिरों में पहुंचने लगे।
सोमवती अमावस्या पर पितरों के निमित्त तर्पण और श्राद्ध कर्म का भी विशेष महत्व माना जाता है। शिप्रा तट पर श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से तर्पण कर अपने पूर्वजों की शांति और कृपा की कामना की। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए धार्मिक कार्यों से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है तथा परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। घाटों पर तर्पण, पूजन और दान-पुण्य के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं।
अधिकमास के अंतिम दिन होने के कारण शहर के प्रमुख मंदिरों में भी भक्तों का विशेष उत्साह देखने को मिला। महाकाल मंदिर सहित अन्य प्रमुख मंदिरों में सुबह से ही दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली की प्रार्थना की। मंदिर परिसरों में दिनभर धार्मिक गतिविधियां जारी रहीं और श्रद्धालु पूजा-अर्चना में जुटे रहे।
ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह दिन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार दोपहर 12:32 बजे सूर्य वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। इस राशि परिवर्तन को भी विशेष महत्व दिया जा रहा है। धर्माचार्यों का कहना है कि जो श्रद्धालु अधिकमास के दौरान दान-पुण्य या धार्मिक अनुष्ठान नहीं कर पाए, उनके लिए सोमवती अमावस्या का यह दिन विशेष अवसर लेकर आया है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए दान, तर्पण और धार्मिक कार्यों से इष्ट देव तथा पितरों की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।
उज्जैन के घाटों और मंदिरों में दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। रामघाट, दत्त अखाड़ा घाट और सोमकुंड पर उमड़ी भीड़ ने कुंभ जैसे दृश्य प्रस्तुत किए, जहां श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला।