मध्यप्रदेश ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीदी के मामले में इस वर्ष देशभर में अग्रणी स्थान हासिल किया है। प्रदेश में अब तक 13 लाख 36 हजार किसानों से 103 लाख 48 हजार मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया जा चुका है। खास बात यह है कि खरीदी प्रक्रिया अभी भी जारी है और सरकार लगातार इसकी निगरानी कर रही है।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने जानकारी देते हुए बताया कि कोविड-19 काल को छोड़ दें तो पिछले 10 वर्षों में इस बार समर्थन मूल्य पर सबसे अधिक गेहूं खरीदा गया है। यह आंकड़ा प्रदेश में कृषि उपज खरीदी व्यवस्था की व्यापकता और किसानों की भागीदारी को भी दर्शाता है।
सीमांत और लघु किसानों की बड़ी हिस्सेदारी
इस वर्ष गेहूं उपार्जन में छोटे किसानों की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही है। अब तक 8 लाख 9 हजार 990 सीमांत एवं लघु कृषकों से 32 लाख 14 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया है। इससे स्पष्ट है कि समर्थन मूल्य व्यवस्था का लाभ बड़े किसानों के साथ-साथ छोटे और सीमांत कृषकों तक भी पहुंचा है।
राज्य सरकार का दावा है कि किसानों को समय पर खरीदी, भुगतान और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के कारण बड़ी संख्या में किसानों ने सरकारी खरीदी केंद्रों का रुख किया।
मुख्यमंत्री की निगरानी में बढ़ा उपार्जन लक्ष्य
मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों के बाद प्रदेश के लिए केंद्र सरकार द्वारा गेहूं खरीदी लक्ष्य में वृद्धि की गई। पहले प्रदेश के लिए 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं उपार्जन का लक्ष्य निर्धारित था, जिसे बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन किया गया।
हालांकि, प्रदेश ने निर्धारित संशोधित लक्ष्य को भी पीछे छोड़ दिया है और 100 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं खरीदी का आंकड़ा पार कर लिया है।
मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं उपार्जन प्रक्रिया की सतत मॉनिटरिंग कर रहे हैं। उन्होंने विभिन्न खरीदी केंद्रों का औचक निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा भी लिया। निरीक्षण के दौरान तौल व्यवस्था, बारदाने की उपलब्धता और किसानों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने किसानों से सीधे संवाद कर भुगतान सहित अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी भी ली।
स्लॉट बुक कराने वाले किसानों को मिली अतिरिक्त राहत
सरकार ने उन किसानों को राहत दी है, जिन्होंने पहले से स्लॉट बुक करा लिया था लेकिन किसी कारणवश समय पर गेहूं नहीं बेच पाए थे। ऐसे किसानों के लिए गेहूं उपार्जन की अवधि 23 मई से बढ़ाकर 28 मई तक कर दी गई है।
सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पंजीकृत किसान अपनी उपज बेचने से वंचित न रहे।
किसानों को 22,842.9 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान
प्रदेश सरकार द्वारा खरीदे गए गेहूं के एवज में किसानों को अब तक 22,842.9 करोड़ रुपए से अधिक की राशि का भुगतान किया जा चुका है। भुगतान प्रक्रिया को तेज और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कई व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।
खरीदी केंद्रों पर किसानों की भीड़ और प्रतीक्षा समय कम करने के उद्देश्य से तौल काटों (वेट मशीनों) की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 कर दी गई है। साथ ही, आवश्यकता अनुसार अतिरिक्त तौल काटे लगाने का अधिकार जिलों को भी सौंपा गया है।
खरीदी केंद्रों पर बढ़ाई गई कार्य अवधि
किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तौल पर्ची जारी करने का समय भी बढ़ाया गया है। पहले जहां यह प्रक्रिया शाम 6 बजे तक होती थी, वहीं अब इसे रात 10 बजे तक बढ़ा दिया गया है।
इसी तरह भुगतान से संबंधित देयक जारी करने का समय भी रात 12 बजे तक निर्धारित किया गया है। गेहूं खरीदी सप्ताह में 6 दिन जारी रखी जा रही है, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
प्रति क्विंटल 2625 रुपए की दर से खरीदी
प्रदेश में किसानों से गेहूं की खरीदी 2625 रुपए प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है। इसमें केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित 2585 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य के साथ राज्य सरकार की ओर से 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस भी शामिल है।
राज्य सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था किसानों को बेहतर मूल्य उपलब्ध कराने और कृषि उत्पादन को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
खरीदी केंद्रों पर सुविधाओं का विशेष ध्यान
सरकार ने दावा किया है कि उपार्जन केंद्रों पर किसानों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। पीने के पानी, बैठने के लिए छायादार स्थान और अन्य जन-सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।
इसके अलावा, उपज की तौल और गुणवत्ता जांच को सुचारू रखने के लिए बारदाने, तौल काटे, हम्माल-तुलावटी, सिलाई मशीनें, कंप्यूटर, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और साफ-सफाई के लिए पंखा एवं छन्ना जैसी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।
साथ ही, समर्थन मूल्य पर खरीदे गए गेहूं के सुरक्षित भंडारण के लिए भी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं, ताकि उपज के संरक्षण में किसी प्रकार की दिक्कत न आए।
प्रदेश में रिकॉर्ड स्तर पर हो रही गेहूं खरीदी को सरकार किसानों के हित में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देख रही है, जबकि आने वाले दिनों में उपार्जन के अंतिम आंकड़े और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।