नरसिंहपुर में भगवान नरसिंह के प्राकट्योत्सव पर जहां एक ओर श्रद्धा और आस्था का माहौल दिखाई दिया, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत ने व्यवस्थाओं की पोल खोल दी. कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल, नर्मदापुरम सांसद दर्शन सिंह चौधरी तथा कलेक्टर रजनी सिंह ने नरसिंह मंदिर में पूजन-अर्चन कर नरसिंह तालाब में जल अर्पित किया.
लेकिन जिस समय तालाब के एक छोर पर जनप्रतिनिधि पवित्र जल समर्पित कर रहे थे, उसी समय दूसरे छोर से गंदे नालों का दूषित पानी तालाब में मिल रहा था. यह विरोधाभास तस्वीरों में कैद हो गया, जिसने नगर की वर्षों पुरानी समस्या को फिर उजागर कर दिया.
तालाब लंबे समय से है चर्चा का विषय
नरसिंह तालाब लंबे समय से नगर में चर्चा का विषय रहा है. इसके जीर्णोद्धार के लिए कई बार प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों द्वारा प्रयास किए गए. पूर्व कलेक्टर रोहित सिंह के कार्यकाल में तालाब के पुनरुद्धार के लिए विशेष अभियान चलाया गया था. फव्वारे लगाए गए, बोटिंग शुरू कराई गई और नहरों के माध्यम से नर्मदा नदी का जल भी यहां लाया गया था. इससे नगरवासियों में उम्मीद जगी थी कि तालाब एक आकर्षण केंद्र बनेगा.
फिर बदहाल हुआ तालाब
वर्तमान में तालाब की स्थिति फिर से दयनीय हो चुकी है. नर्मदा जल की आपूर्ति बंद हो गई है, आसपास गंदगी फैलने लगी है और घरों का दूषित पानी दोबारा तालाब में छोड़ा जा रहा है. तालाब में सूअर और अन्य जानवरों का जमावड़ा बढ़ गया है, जिससे स्थिति और खराब हो गई है. अब गंदे नालों का पानी ही तालाब का मुख्य स्रोत बन गया है.
आस्था आज भी बरकरार
इन परिस्थितियों के बावजूद स्थानीय महिलाएं इस तालाब को मां नर्मदा का स्वरूप मानकर नियमित रूप से आरती करती हैं. उनका कहना है कि नालों के गंदे पानी को रोकने के लिए कई बार प्रशासन को आवेदन दिए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जनप्रतिनिधियों की आस्था केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी, या फिर नरसिंह तालाब को वास्तव में वह स्वरूप मिल पाएगा, जिसकी उम्मीद नगरवासी वर्षों से करते आ रहे हैं.
क्या कहते हैं अधिकारी
मुख्य नगर पालिका अधिकारी नीलम सिंह चौहान ने कहा कि जल्द ही वहां वाटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित कर नाले के पानी को सीवरेज लाइन में परिवर्तित किया जाएगा, जिससे गंदा पानी तालाब में जाने से रोका जा सकेगा