शनिवार की सुबह कई लोगों के लिए बिल्कुल सामान्य चल रही थी, लेकिन ठीक 11:45 बजे अचानक माहौल बदल गया। देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों के मोबाइल फोन एक साथ तेज सायरन की आवाज के साथ बज उठे। स्क्रीन पर एक चेतावनी जैसा संदेश दिखा और कुछ ही क्षणों बाद वही संदेश मोबाइल ने खुद पढ़कर भी सुनाया।
अचानक हुए इस घटनाक्रम ने लोगों को चौंका दिया। किसी को लगा कोई बड़ी आपात स्थिति आ गई है, तो कुछ लोग यह समझने की कोशिश करते रहे कि आखिर यह अलर्ट क्यों आया।
कुछ ही देर में स्पष्ट हुआ कि यह कोई खतरे की सूचना नहीं, बल्कि एक तयशुदा अभ्यास था।
NDMA का ट्रायल, इमरजेंसी सिस्टम की जांच
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने इस अलर्ट को एक परीक्षण के रूप में जारी किया था। इसका मकसद यह देखना था कि आपात स्थिति में देशभर के लोगों तक एक साथ और तुरंत सूचना पहुंचाने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
2 मई को इसी उद्देश्य से “सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम” की टेस्टिंग की गई, ताकि भविष्य में किसी भी संकट के समय चेतावनी बिना देरी के लोगों तक पहुंच सके।
राजधानियों से लेकर NCR तक एक साथ अलर्ट
यह परीक्षण सीमित क्षेत्र में नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर किया गया। देश के सभी राज्यों की राजधानियों और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में एक ही समय पर मोबाइल फोन पर यह अलर्ट भेजा गया।
मैसेज केवल हिंदी और अंग्रेजी तक सीमित नहीं था, बल्कि इसे विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में भी प्रसारित किया गया, जिससे अलग-अलग भाषाई क्षेत्रों के लोग भी इसे समझ सकें।
पहले ही दी गई थी सूचना, फिर भी चौंके लोग
सरकार की ओर से दो दिन पहले ही यह जानकारी साझा की गई थी कि एक टेस्ट अलर्ट भेजा जाएगा और इसे लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। इसके बावजूद जब मोबाइल पर सायरन बजा, तो कई लोग असहज हो गए।
देश में तैयार हुआ ‘SACHET’ अलर्ट सिस्टम
आपदा के समय तेज और व्यापक सूचना देने के लिए भारत में ही ‘SACHET’ नाम का सिस्टम विकसित किया गया है। इसे सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमेटिक्स (C-DOT) ने तैयार किया है। यह कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (CAP) पर आधारित है और देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सक्रिय किया जा चुका है।
बिना इंटरनेट भी पहुंचेगा मैसेज
इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें इंटरनेट की जरूरत नहीं होती। सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक के जरिए किसी एक इलाके में मौजूद सभी मोबाइल फोन पर एक साथ अलर्ट भेजा जा सकता है। इससे आपात स्थिति में सूचना देने में देरी नहीं होती।
पहले भी करोड़ों नहीं, अरबों मैसेज भेजे जा चुके
यह सिस्टम नया जरूर है, लेकिन इसका उपयोग पहले भी कई बार किया जा चुका है। मौसम से जुड़ी चेतावनियों और चक्रवात जैसे खतरों के दौरान इस तकनीक के जरिए बड़े पैमाने पर अलर्ट भेजे गए हैं। अब तक 19 से अधिक भारतीय भाषाओं में 134 अरब से ज्यादा संदेश प्रसारित किए जा चुके हैं।
आसान भाषा में समझें
- यह सिस्टम किसी एक नंबर पर नहीं, बल्कि पूरे इलाके के सभी मोबाइल पर एक साथ मैसेज भेजता है
- इंटरनेट की जरूरत नहीं होती
- आपदा, मौसम या राष्ट्रीय आपात स्थिति में उपयोग होता है
- NDMA और दूरसंचार विभाग मिलकर इसे संचालित कर रहे हैं