प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में विकास और सांस्कृतिक विरासत को साथ लेकर आगे बढ़ने की जो सोच विकसित हुई है, उसी कड़ी में अब मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच धार्मिक पर्यटन और सुशासन को लेकर एक नया समन्वय आकार ले रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वाराणसी दौरे के दौरान इस विज़न को साझा करते हुए कहा कि “विरासत के साथ विकास” का मॉडल दोनों राज्यों के बीच न केवल सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि जनकल्याण के नए आयाम भी स्थापित करेगा।
वाराणसी पहुंचकर मुख्यमंत्री ने अपने दौरे की शुरुआत श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना से की। गर्भगृह में विधि-विधान से पूजन करते हुए उन्होंने प्रदेश की खुशहाली और निरंतर प्रगति की कामना की। इसके बाद वे गंगा घाट पहुंचे, जहां उन्होंने मां गंगा का पूजन कर आस्था व्यक्त की। इस दौरान उन्होंने कहा कि काशी धाम की आध्यात्मिक ऊर्जा और व्यवस्था का अनुभव अत्यंत विशेष है, जो हर श्रद्धालु को भीतर तक जोड़ देता है।
दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का विस्तार से निरीक्षण किया और यहां की व्यवस्थाओं को करीब से समझा। उन्होंने बताया कि काशी और उज्जैन के महाकाल धाम के बीच व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता (एमओयू) किया जा रहा है। इसका उद्देश्य तीर्थयात्रियों को दोनों ही धामों में अधिक सुगम, सुरक्षित और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इस अवसर पर उन्होंने लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि भी दी।
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से आगामी सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को लेकर काशी के मॉडल को उपयोगी बताया। काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के साथ हुई बैठक में उन्होंने यहां लागू भीड़ प्रबंधन, डिजिटल टोकन सिस्टम, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और सुरक्षा व्यवस्था का विस्तृत अध्ययन किया। उन्होंने कहा कि प्रयागराज कुंभ और काशी कॉरिडोर के अनुभवों से सीख लेकर उज्जैन में भी श्रद्धालुओं के लिए बेहतर और व्यवस्थित व्यवस्था विकसित की जाएगी, ताकि दर्शन की प्रक्रिया सहज और सुगम हो सके।
डॉ. यादव ने यह भी जानकारी दी कि उज्जैन के महान सम्राट विक्रमादित्य के जीवन और उनके आदर्श शासन को जन-जन तक पहुंचाने के लिए वाराणसी में 3 से 5 अप्रैल तक भव्य नाट्य प्रस्तुति आयोजित की जाएगी। इस आयोजन में सैकड़ों कलाकार हिस्सा लेंगे और पारंपरिक भारतीय कलाओं के साथ ऐतिहासिक झलकियों को जीवंत किया जाएगा।
उन्होंने मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच बढ़ते आर्थिक और बुनियादी सहयोग का भी जिक्र किया। विशेष रूप से केन-बेतवा लिंक परियोजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इससे दोनों राज्यों के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और सिंचाई के साथ बिजली आपूर्ति भी बेहतर होगी। इस दौरे में दोनों राज्यों के मंत्री, प्रशासनिक अधिकारी और मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने मिलकर धार्मिक पर्यटन और विकास के इस साझा विज़न को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।