कोलकाता इस्कॉन की ऐतिहासिक रथयात्रा में हुआ बड़ा बदलाव, 48 साल बाद बदले गए रथ के पहिए; अब दौड़ेगा सुखोई जेट के टायरों पर भगवान जगन्नाथ का रथ!

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जनतंत्र, मध्यप्रदेश, श्रुति घुरैया:

कोलकाता की ऐतिहासिक इस्कॉन रथयात्रा में इस साल एक बड़ा और अनोखा बदलाव देखने को मिलेगा। 1972 से लगातार आयोजित हो रही इस भव्य रथयात्रा के रथ के पहियों को 48 साल बाद पहली बार बदला गया है। हैरानी की बात यह है कि इस बार भगवान जगन्नाथ का रथ विमान नहीं, बल्कि लड़ाकू विमान सुखोई जेट के टायरों पर चलेगा। रथ में लगाए जा रहे ये टायर रूसी फाइटर जेट के हैं, जिनकी टेकऑफ स्पीड 280 किमी प्रति घंटा तक होती है। हालांकि, भगवान का रथ बेहद धीमी गति – केवल 1.4 किमी प्रति घंटा से आगे बढ़ेगा, क्योंकि इसका उद्देश्य सिर्फ यात्रा करना नहीं, बल्कि भक्तों को भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से जोड़ना है।

इस्कॉन कोलकाता के प्रवक्ता राधारमण दास ने बताया कि पिछले कई वर्षों से रथ के पुराने टायरों की स्थिति खराब होती जा रही थी और उन्हें चलाने में काफी कठिनाई हो रही थी। आयोजक पिछले 15 सालों से नए टायरों की तलाश कर रहे थे। पहले रथ के लिए बोइंग विमान के पुराने टायरों का उपयोग किया जाता था, लेकिन अब बाजार में वे उपलब्ध नहीं हो रहे थे। ऐसे में आयोजकों ने एक अलग और नया समाधान तलाशा – सुखोई फाइटर जेट के टायर। आयोजकों ने सुखोई टायर निर्माता कंपनी से संपर्क किया और जब उन्होंने टायरों का कोटेशन मांगा, तो कंपनी हैरान रह गई कि कोई धार्मिक रथयात्रा में फाइटर जेट के टायर क्यों चाहता है। बाद में पूरी बात समझाने और रथ की संरचना दिखाने के लिए कंपनी के प्रतिनिधियों को कोलकाता बुलाया गया, जिसके बाद सहमति बनी और इस्कॉन को चार टायर प्राप्त हुए।

इन दिनों इन टायरों को रथ में सावधानीपूर्वक फिट किया जा रहा है ताकि 27 जून से शुरू होने वाली रथयात्रा से पहले सारी तैयारियां पूरी हो सकें। इस बार रथयात्रा 8 दिन तक चलेगी और 5 जुलाई को इसका समापन होगा। इस यात्रा में भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ कोलकाता की सड़कों से गुजरते हैं। ब्रिगेड परेड ग्राउंड में रथयात्रा के दौरान भव्य मेला भी आयोजित किया जाता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं और रथ को खींचने का पुण्य अर्जित करते हैं।

जानकारी के लिए बता दें, यह रथयात्रा वैष्णव परंपरा का हिस्सा है और कोलकाता में इसे बेहद भक्ति और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। ओडिशा के पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ के मूल मंदिर की तरह कोलकाता की रथयात्रा भी बेहद खास होती है। पुरी की रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा 3 किमी की दूरी तय कर गुंडिचा मंदिर पहुंचते हैं, जहां वे 7 दिन ठहरते हैं। आठवें दिन ‘बहुड़ा यात्रा’ के जरिए वे वापस अपने मंदिर लौटते हैं।

वहीं, भगवान जगन्नाथ के रथ का नाम ‘नंदीघोष’ है, जिसमें कुल 16 विशाल पहिए होते हैं और हर पहिए की ऊंचाई 6 फीट होती है। इन पहियों के भी अलग-अलग नाम हैं – विष्णुबुद्धि, विभूति, प्रज्ञा, धि, ज्ञान, प्रेम, आसक्त, रति, केलि, सत्य, सुष्वती, जागृति, तुरीय, आम, अणिमा और निर्वाण। रथ की ध्वजा का नाम ‘त्रैलोक्यमोहिनी’ है और इसमें कुल 742 लकड़ी के टुकड़े उपयोग किए जाते हैं। रथ को खींचने के लिए जो रस्सी उपयोग की जाती है, उसे ‘शंखचूड़’ कहा जाता है और रथ के सारथी का नाम ‘दारुक’ है।

मान्यता है कि रथ की सफेद ध्वजा पर स्वयं हनुमानजी विराजते हैं, इसलिए रथ को ‘कपिध्वज’ भी कहा जाता है। कोलकाता इस्कॉन परिसर में भगवान जगन्नाथ के साथ हनुमानजी का भी एक मंदिर मौजूद है।