जनतंत्र, मध्यप्रदेश, श्रुति घुरैया:
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी के एक बयान ने पूरे सदन को हिला कर रख दिया। जब अबू आजमी ने सदन में औरंगजेब को क्रूर शासक मानने से इनकार किया और यहां तक कह दिया कि उसने कई मंदिर बनवाए थे, तो सत्ता पक्ष के नेताओं ने हंगामा खड़ा कर दिया। बीजेपी और शिवसेना नेताओं ने इसे छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान बताया और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। माहौल इतना गरमा गया कि विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें पूरे बजट सत्र के लिए निलंबित कर दिया।
लेकिन मामला सिर्फ महाराष्ट्र तक ही सीमित नहीं रहा। यूपी विधानसभा में भी इस बयान की गूंज सुनाई दी, जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। योगी ने दो टूक कहा, “जो भारत की आस्था को रौंदने वाले का महिमामंडन करता है, उसे सपा से बाहर निकाल देना चाहिए। उसे उत्तर प्रदेश बुलाइए, यहां ऐसे लोगों का सही इलाज करना आता है।”
आजमी के बयान पर विवाद बढ़ता देख उन्होंने सफाई देने की कोशिश की और कहा कि उनके शब्दों को “तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया” और अगर किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वह अपना बयान वापस लेते हैं। लेकिन तब तक राजनीतिक पारा इतना बढ़ चुका था कि बीजेपी और शिवसेना पीछे हटने के मूड में नहीं थीं। डिप्टी सीएम ने तो यहां तक कह दिया कि “अबू आजमी पर देशद्रोह का केस दर्ज होना चाहिए।”
अबू आजमी कौन हैं?
अबू आजमी यूपी के आजमगढ़ से ताल्लुक रखते हैं, लेकिन महाराष्ट्र में सपा के सबसे बड़े चेहरे हैं। वह मानखुर्द शिवाजी नगर सीट से लगातार तीन बार विधायक रह चुके हैं। 2002 से 2008 तक वह राज्यसभा सांसद भी रहे।

