उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में आयोजित 30वां दीक्षांत समारोह मंगलवार को उत्साह और गरिमा के साथ संपन्न हुआ। स्वर्ण जयंती सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने अध्यक्षता की, जबकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
समारोह के दौरान मेधावी विद्यार्थियों को उपाधियां और सम्मान प्रदान किए गए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, अभिभावक और शिक्षाविद मौजूद रहे।
राज्यपाल का संदेश: शिक्षा का अर्थ जिम्मेदारी
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने अपने संबोधन में कहा कि दीक्षांत केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक बनने की शुरुआत है। उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन में मिले संस्कारों को बनाए रखने और समाज व देश के विकास में योगदान देने का संदेश दिया।
उन्होंने उज्जैन की आध्यात्मिक पहचान का जिक्र करते हुए कहा कि इस नगरी में आकर एक अलग ही ऊर्जा का अनुभव होता है। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को अपने माता-पिता और गुरुओं के प्रति सम्मान बनाए रखने की सलाह दी।
मुख्यमंत्री बोले: उज्जैन ज्ञान और परंपरा का केंद्र
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह नगरी प्राचीन काल से ही शिक्षा, ज्ञान और साधना का केंद्र रही है। भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली और सम्राट विक्रमादित्य की कर्मभूमि होने के कारण यह शहर विशेष महत्व रखता है।
उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह जीवन में एक नए चरण की शुरुआत है, जहां निरंतर सीखने की भावना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि यहां से निकलने वाले विद्यार्थी देश और समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
विश्वविद्यालय को नई सौगातें
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय के लिए कई घोषणाएं भी कीं। उन्होंने आधुनिक उपकरणों के लिए 51 लाख रुपए, 5 ड्रोन और विद्यार्थियों की अध्ययन यात्राओं के लिए एक बस देने की घोषणा की।
इसके साथ ही करीब 17 करोड़ रुपए की लागत से बने कृषि अध्ययनशाला भवन और नव-निर्मित भर्तृहरि छात्रावास का लोकार्पण भी किया गया।
शिक्षा और नवाचार पर जोर
मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संस्थान नवाचार और आधुनिक पाठ्यक्रमों के लिए प्रदेश में अग्रणी रहा है। कृषि और डेयरी टेक्नोलॉजी जैसे विषयों की शुरुआत इसका उदाहरण है।
समारोह में दिखी पारंपरिक झलक
दीक्षांत समारोह की शुरुआत अकादमिक शोभायात्रा से हुई। अतिथियों का स्वागत पारंपरिक तरीके से किया गया और एनसीसी कैडेट्स द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की ओर से प्रकाशित पुस्तकों का विमोचन किया गया और हथकरघा उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन भी अतिथियों ने किया।
विद्यार्थियों को मिला सम्मान
समारोह में शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधियां, मेधावी छात्रों को गोल्ड मेडल और विशेष उपलब्धि हासिल करने वालों को उच्च सम्मान प्रदान किए गए।
कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ, जबकि पूरे आयोजन के दौरान उत्सव जैसा माहौल बना रहा।